इस चरण के सभी विधानसभा सीटें नक्सल प्रभावित थी। नक्सली इलाकों के दहशतजदा लोगों के साथ शान्तिपूर्ण मतदान की उम्मीद बेमानी लग रही थी। लेकिन इन्हीं इलाकों में नयी इबारत लिखी गई। लोकतंत्र की जीत की नयी कहानी। खौफजदा शहर, विस्फोट, आये दिन बंद और अनहोनी की हमेशा आशंका के बीच वोटर उन ताकत पर भारी पड़े जिन्होनें लोकतंत्र को बंधक बना लिया है।
पहले चरण के मतदान की अपेक्षा दूसरे चरण के मतदान प्रतिशत में बढ़ोत्तरी भी ये साबित करती है कि वोटर अपने लोकतांत्रिक अधिकार के इस्तेमाल के लिए घरों से निकल रहे हैं। शान्तिपूर्ण मतदान के साथ वोटिंग प्रतिशत के बढ़ने का मतलब साफ है कि राज्य की जनता एक बेहतर भविष्य और बदलाव की परिकल्पना में जुट गयी है।
तीन चरण का मतदान अभी बाकी है। चुनाव आयोग, प्रशासन और वोटरों को यही उत्साह और हौसला बनाए रखना है. क्योंकि लोकतंत्र का यही तकाजा है कि हम अपना जज्बा बरकरार रखे तभी सपनों के कल को साकार कर सकते हैं। हमें ये भी ध्यान रखना होगा कि तमाम विरोधों के बावजूद वोटरों की कतार और लंबी हो।
इन्हीं विचारों के साथ-
"इस धधकती राज्य की एक लंबी है व्यथा,
पीर कितनी सह रहे हैं क्या किसी को है पता....!"
धन्यवाद... ।
इस बार की चिट्टी आप तक पहुँचाने में काफी वक्त लगा, इसके liye क्षमाप्रार्थी हूँ। मीडिया में वक्त की कमी से जूझ रहा हूँ। खैर इस बार की चिट्ठी है सचिन के नाम जिसने हम सभी देशवासियों को एक बार फ़िर मुस्कुराने का मौका दिया