गुरुवार, 10 दिसंबर 2009

बुलेट पर बैलेट भारी

इस बार की चिट्ठी आई है झारखण्ड से। वहां हो रहे विधानसभा चुनाव २००९ का दूसरा चरण भी पूरा हो गया। खास बात ये रही कि इस चरण की लगभग सभी सीटें उन इलाकों की है जहाँ सरकार की नहीं किसी और की सत्ता चलती है। आप भी पढ़िए कैसा रहा इस चरण का चुनाव।
दूसरे चरण के मतदान में 14 सीटों के लिए ५४ फीसदी मतदान हुआ. २५९ उम्मीदवारों की किस्मत इवीएम में कैद हो गई। नक्सली खौफ और छिटफुट हिंसा के बीच बुलेट पर बैलेट भारी पड़ा। कोई बड़ी घटना का ना होना ये यकीं दिलाता है कि प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इन्तजामात किये थे।
इस चरण के सभी विधानसभा सीटें नक्सल प्रभावित थी। नक्सली इलाकों के दहशतजदा लोगों के साथ शान्तिपूर्ण मतदान की उम्मीद बेमानी लग रही थी। लेकिन इन्हीं इलाकों में नयी इबारत लिखी गई। लोकतंत्र की जीत की नयी कहानी। खौफजदा शहर, विस्फोट, आये दिन बंद और अनहोनी की हमेशा आशंका के बीच वोटर उन ताकत पर भारी पड़े जिन्होनें लोकतंत्र को बंधक बना लिया है।
पहले चरण के मतदान की अपेक्षा दूसरे चरण के मतदान प्रतिशत में बढ़ोत्तरी भी ये साबित करती है कि वोटर अपने लोकतांत्रिक अधिकार के इस्तेमाल के लिए घरों से निकल रहे हैं। शान्तिपूर्ण मतदान के साथ वोटिंग प्रतिशत के बढ़ने का मतलब साफ है कि राज्य की जनता एक बेहतर भविष्य और बदलाव की परिकल्पना में जुट गयी है।
तीन चरण का मतदान अभी बाकी है। चुनाव आयोग, प्रशासन और वोटरों को यही उत्साह और हौसला बनाए रखना है. क्योंकि लोकतंत्र का यही तकाजा है कि हम अपना जज्बा बरकरार रखे तभी सपनों के कल को साकार कर सकते हैं। हमें ये भी ध्यान रखना होगा कि तमाम विरोधों के बावजूद वोटरों की कतार और लंबी हो।
आइए राज्य में बदलाव की इस नयी पहल में हम सब भागीदार बने। क्योंकि ये अवाम की आवाज़ और जरुरत है जो विकास को गले लगाने का सपना देख रही है।
इन्हीं विचारों के साथ-
"इस धधकती राज्य की एक लंबी है व्यथा,
पीर कितनी सह रहे हैं क्या किसी को है पता....!"

धन्यवाद... ।

रविवार, 29 नवंबर 2009

चुनावी उदासीनता का मतलब...!

इस बार की चिट्ठी आई है झारखण्ड से। ठण्ड के इस मौसम में जहां चुनावी मौसम गर्म है।चुनाव का पहला चरण ख़त्म और चार चरण बाकी। आइये चीरफाड़ करते हैं पहले चरण का।

पहले चरण में 26 सीटों पर 52 फीसदी मतदान हुआ। नये गठबंधन बने और चुनाव प्रचार को हाई प्रोफाइल बनाने के लिए दिल्ली झारखंड में आ बसी. अखाड़े में दिग्गजों का जमावड़ा और उनकी सभा जनता को अपने पास आने का न्योता दे रही है. बुढिया कांग्रेस के युवा महासचिव, वीजेपी विद डिफरेन्ट के पालनहार, अनुभव का खजाना और मंच से उतरकर आम लोगों जैसा बनने की नौटंकी. साथ ही साथ युवा चेहरों की दस्तक. सियासत के महायोद्धा ने चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.
पर कहां कमी रह गयी? चुनाव आयोग के वायदे और अभियान का क्या हुआ? शायद इसका जवाब मतदाता दे चुके हैं. पिछले चुनाव की तुलना में इस बार मतदान प्रतिशत में भारी कमी , इस बात की गवाही देता है कि नेताओं के उठाये गये मुद्दे पर मतदाता खामोश हैं.
क्या वाकई मुददे है? या मुददों को हवा दी गई है. देश में झारखंड ऐसा पहला राज्य है जो पिछले नौ सालों के मुद्दत में तीन मुख्यमंत्रियों पर भ्रष्टाचार का आरोप देखा. देश के सबसे बड़े घोटाले का आरोप लगा. नक्सलवाद जैसे गंभीर मुददे कहां गायब हो गये?
ये किस्सा लोकतंत्र को बचाने की है. आगे और भी चुनावी चरण बाकी हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि झारखंडवासियों का विश्वास हमारे नेताओं से उठ गया है !
नेताओं के लिए इसी विचार के साथ-
"तुम कलीम चेहरे से दाग पोंछ लो अपने,
वरना कुछ नहीं होगा आईना बदलने से..."

धन्यवाद..

गुरुवार, 26 नवंबर 2009

20 बरस के सचिन

इस बार की चिट्टी आप तक पहुँचाने में काफी वक्त लगा, इसके liye क्षमाप्रार्थी हूँ। मीडिया में वक्त की कमी से जूझ रहा हूँ। खैर इस बार की चिट्ठी है सचिन के नाम जिसने हम सभी देशवासियों को एक बार फ़िर मुस्कुराने का मौका दिया
क्रिकेट अगर स्वर्ग है तो सचिन इस स्वर्ग के भगवान हैं जो अपने कद से बड़े क़ारीगर हैं और अपनी इस कारीगरी से हर भारतीय के चेहरे पर मुस्कान बिखेर देते हैं। सचिन की सबसे बड़ी विशेषता है क्रिकेट के प्रति उनका समर्पण और अधिक से अधिक रन बटोरने की भूख। मैदान में उनकी एकाग्रता और चपलता कठिनाईयों को बगैर कोई भावना दर्शाए मुकाबला करने का ठोस उदाहरण है। अपनी इसी दीवानगी को सच करने में सचिन ने किस तरह भारतीय क्रिकेट में 20 बरस बीता दिया ये सबके बूते की बात नहीं है। विश्व क्रिकेट में रिकॉर्डों के हिमालय पर विराजमान सचिन ने अपने रिकार्डों में एक और हीरा जड़ लिया है। 1989 में सोलह साल और 205 दिन में जब पाकिस्तान के खिलाफ बल्ला लेकर मैदान में उतरे तो किसी को क्या मालूम था कि ये छोटा सा बच्चा लिटिल मास्टर आने वाले समय मास्टर ब्लास्टर का विकराल रूप धारण कर लेगा।
सचिन शायद एक मात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके पास क्रिकेट की किताब के सारे शार्टस मौजूद हैं। क्रिकेट सचिन का एक मात्र शौक है उसके साथ ही वह चौबीसों घंटे खाते पीते, सोचते और समय बिताना पसंद करते हैं। क्रिकेटरों का सपना अगर सचिन जैसा बनना है तो, कौन कहता है कि उन्हें ऐसा सपना नहीं देखना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अपने आगमन के साथ ही सचिन ने क्रिकेट जगत को जिस तरह चमत्कृत करना शुरू किया. इससे साफ हो गया था कि महज एक खिलाड़ी नहीं बल्कि उनका पदार्पण ही इतिहास निर्माता के रूप में हुआ है।
20 वर्षो के अपने इस सफर में सचिन ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को वो सबकुछ दिया है जो शायद ही सभी क्रिकेटर दे सके। वैसे भी सचिन के लिए साबित करने को कुछ बचा नहीं है। उम्र, फिटनेंस और प्रतिभा के लिहाज से सचिन अभी 4-5 साल और खेलेंगे। ऐसे में उनके क्रिकेट करियर के कुल रिकॉड्स का अंदाजा लगाना कठिन है। उम्मीद है क्रिकेट जगत का ये नक्षत्र आगे भी अपनी चमक बिखेरता रहेगा और सारी दुनिया को अपने प्रदर्शन से चमत्कृत करता रहेगा.
इसी विचार के साथ-
"पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब,
खेलोगे कूदोगे तो भी बनोगे नवाब...."
धन्यवाद्...

शनिवार, 19 सितंबर 2009

एक और मीडिया न्यूज़ पोर्टल का आगाज़

इस बार की चिट्ठी आई है -हाल ही में शुरू हुए मीडिया न्यूज़ पोर्टल से। मीडिया हाउस की बढती तादाद और युवाओं में बढ़ते मीडिया क्रेज को देखते हुए अब मीडिया खबर देने वाले पोर्टल खूब मशहूर हो रहे हैं। बिहार झारखण्ड से एक नए मीडिया न्यूज़ पोर्टल के शुरू होने की खबर है। नाम है "ख़बरदार मीडिया" , जो मीडिया की सभी खबरों और गतिविधियों को पहले और विश्वसनीय तरीके से प्रकाशित करता है। इस पोर्टल की खासियत है युवाओं को तरजीह देना।
ख़बरदार मीडिया के चीफ एडिटर राजीव करूणानिधि ने बताया कि युवा पत्रकार ही देश के भविष्य हैं। इसलिए युवाओं के विचार को महत्त्व देकर ही हम पत्रकारिता को सही दिशा में आगे ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया रोजमर्रा से जुडी हर खबर को लोगों तक पहुंचाता है पर कभी उनकी खबर और खैरियत नहीं मिल पाती है। उन खबरों के पीछे इतनी मेहनत करते है। ख़बरदार मीडिया वो प्लेटफॉर्म जो देश विदेश और तमाम पत्रकार और मीडिया की खबर को सबसे पहले आप तक पहुंचाता है।
वहीं इस मीडिया पोर्टल के एडिटर समीर सृजन का कहना है कि हमने उन युवाओं का भी ख्याल रखा है जो मीडिया में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं। मीडिया में उतार चढाव भरे जीवन को हम सीधे-साधे तरीके से उन युवाओं के सामने पेश करते हैं ताकि रंगीन सपने बुननेवाले भोले भाले मीडिया स्टुडेंट किसी हादसे का शिकार ना हो जाये। उन्होंने कहा कि मीडिया का हब या यूं कहे कि मीडिया की राजधानी फिल्म सिटी नॉएडा की तक़रीबन सभी हलचल परोसने के लिए हमने एक नया कोना शुरू किया है, जिसका नाम है सीधे फिल्म सिटी से। इस पोर्टल के कंटेंट की जिम्मेदारी राजीव करूणानिधि और समीर सृजन के कन्धों पर है।
वहीं सीइओ प्रभात प्रखर प्रबंधन का जिम्मा सँभालते हैं। प्रभात पेशे से ऑटोमोबाइल इंजीनियर हैं लेकिन मीडिया के बढ़ते प्रभाव से अपने आप को बचा ना सके और इस क्षेत्र में उतर गए।
सभी राजधानियों और शहरों में ख़बरदार मीडिया के प्रतिनिधि हैं जो मीडिया की पल पल की खबर हम तक पहुंचाते हैं और हम आप तक.
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